झूठ की परत Jhoot Ki Parat- Hindi Novellete

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Description

पुस्तक परिचय :

कहते हैं एक झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ और बोलने पड़ते हैं | पर झूठ बोलने वाला कभी ये नहीं सोचता कि उसके झूठ का सामने वाले पर क्या प्रभाव पड़ेगा, या शायद सोचकर भी वो इसे ज्यादा भाव नहीं देता | झूठ बोलने के कई कारण हो सकते हैं – डर, घृणा, गुस्सा, या फिर ये भी हो सकता है कि कोई कारण हो ही नहीं | पर झूठ, झूठ ही होता है; और जिससे हम झूठ बोलते हैं उसे हम धोखा ही दे रहे होते हैं | हम चाहे अपने झूठ को कितना भी अपनी मजबूरी का नाम दे दें, पर फिर भी हम उस कर्म से अपना पीछा नहीं छुड़ा सकते जो हमने अपने झूठ से किसी को प्रभावित करके अर्जित किया | और जब हमारे झूठ से बनी परतें एक के बाद एक खुलती हैं, तो उसके अन्दर से निकला सच किसी के जीवन को कितना भयंकर रूप से प्रभावित कर सकता है, ये हम सोच भी नहीं सकते | “झूठ की परत” झूठ की इन्हीं परतों में उलझे जीवन की कहानी है |

Publisher : Notion Press ;  Pages 62;

About the Author 

Pratyasha Nithin is a budding writer and a self-taught artist currently residing in Mysore, India. She creates traditional paintings of Hindu deities based on their dhyana mantras available in various Hindu texts. She has written articles and blog-posts on women’s issues. She is passionate about story-telling and believes that it is a powerful medium to convey ideas and ideals. She regularly contributes short stories (Hindi & English) to Pragyata magazine. She has published two Hindi novelettes “मायापाश” and “झूठ की परत” and a full-fledged novel “कृष्णसाक्षी’.

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